डॉ. कुमार विश्वास -कोई दीवाना कहता है
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डॉ कुमार विश्वास एक हिंदी कवी है ,जो की अपनी कविता ुर सायरी की वजह से बहुत ही प्रसिद्ध है |
ये हिंदी के लेक्चर है और इन्होने आम आदमी पार्टी भी ज्वाइन कीया है |
फेमस सायरी
मोहब्बत एक अहसासों की, पावन सी कहानी है,
कभी कबिरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं,
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है।
कभी कबिरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं,
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है।
तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ,तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ,तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन,तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ।
कोई खामोश है इतना, बहाने भूल आया हूँकिसी की इक तरनुम में, तराने भूल आया हूँमेरी अब राह मत तकना कभी ए आसमां वालोमैं इक चिड़िया की आँखों में, उड़ाने भूल आया हूँ
ना पाने की खुशी है कुछ, ना खोने का ही कुछ गम हैये दौलत और शोहरत सिर्फ, कुछ ज़ख्मों का मरहम हैअजब सी कशमकश है,रोज़ जीने, रोज़ मरने मेंमुक्कमल ज़िन्दगी तो है, मगर पूरी से कुछ कम है
पनाहों में जो आया हो, उस पर वार क्या करनाजो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर से अधिकार क्या करनामोहब्बत का मज़ा तो, डूबने की कशमकश में हैजो हो मालूम गहरायी, तो दरिया पार क्या करना
वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता हैवो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता हैकिसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले सेयहाँ ख़त भी थोड़ी देर में अखबार होता है
मेरे जीने मरने में, तुम्हारा नाम आएगामैं सांस रोक लू फिर भी, यही इलज़ाम आएगाहर एक धड़कन में जब तुम हो, तो फिर अपराध क्या मेराअगर राधा पुकारेंगी, तो घनश्याम आएगा
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| कोई दीवाना कहता है |



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